हॉस्पिटल में 5 दिन तक गर्भ में मरे बच्चे के साथ एडमिट रही महिला की मौत, पति ने लगाया डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

चंडीगढ़. बद‌्दी में रहने वाली 24 साल की महिला ज्योति के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई थी। ज्योति की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 में रेफर कर दिया। पांच दिन तक पेट में मरे हुए बच्चे के साथ वह जीएमएसएच-16 के लेबर में एडमिट रही। यहां छठे दिन सुबह उसकी मौत हो गई। मरने से पहले महिला की अपने पति के साथ बात हुई थी। उसने बताया था कि वह रात से दर्द के कारण परेशान है लेकिन कोई भी उसका इलाज नहीं कर रहा है। वह रो-रोकर कई बार डॉक्टर और स्टाफ से अपील करती रही कि उसे दर्द हो रहा है, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। वहां पर तैनात फोर्थ क्लास स्टाफ उसके साथ बदसलूकी करता रहा।
आज होगा पास्टमार्टम:महिला के पति ने सेक्टर-17 थाना पुलिस में इलाज में लापरवाही की शिकायत दी है। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। सोमवार को डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमार्टम किया जाएगा। सुमोध कुमार प्रजापति बद‌्दी में परिवार समेत रहते हैं। वे मजदूरी करते हैं। उनकी दो साल पहले ज्योति के साथ शादी हुई थी। करीब 9 महीने पहले पत्नी ज्योति गर्भवती हुई। उसका ट्रीटमेंट बद‌्दी के गवर्नमेंट हॉस्पिटल में ही चल रहा था। लेकिन नौवें महीने में किन्हीं कारणों से बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई। 24 जुलाई को डॉक्टरों ने चंडीगढ़ के सेक्टर-16 के हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया। वे शाम को 5 बजे यहां पहुंचे। पत्नी को लेबर रूम में रखा गया था। वह रोजाना पत्नी को सुबह-शाम मिलते थे। पत्नी अकसर बताती थी कि उसे बहुत तेज दर्द होता है। डॉक्टरों को भी इस बारे में बताया, लेकिन उन्होंने कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
सुबह 6 बजे मिला था, 7 बजे पता चला नहीं रही पत्नी:सुबोध के मुताबिक वह पत्नी को शनिवार शाम मिले थे। पत्नी ने उन्हें बोला था कि वह यहां बहुत परेशान है। जब वह पत्नी से लेबर रूम के दरवाजे पर बात कर रहे थे, तब भी सिक्योरिटी गार्ड व वहां के इम्प्लॉइज ने उनसे बदतमीजी की। पत्नी को चिल्लाते हुए डांटा और अंदर भेज दिया। रविवार सुबह 5 बजे भी पत्नी से मिला। इस बार भी ज्योति ने उन्हें बोला कि रात को 8 बजे से दर्द हो रहा है। कोई भी उनकी सुन नहीं रहा है। दर्द के बारे में बताने पर भी उनके साथ बदसलूकी की जाती है, उन्हें अपशब्द बोले जाते हैं, गालियां देते हैं। इसके बाद ज्योति लेबर रूम में चली गई। रविवार सुबह 7 बजे के करीबी डॉक्टरों ने मुझे बुलाया और कहा कि अापकी पत्नी की मौत हो गई है।
अगर महिला को दर्द है या फीवर है तो तुरंत ऑपरेशन कर बच्चा निकाल देना चाहिए:चेतन्य हॉस्पिटल के गायनाकोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड डॉ. पूनम कुमार का कहना है कि अगर गर्भ में बच्चे की डेथ हो गई है, तो हम महिला का वीकली टेस्ट ‘कोएग्युलेशन प्रोफाइल’ करवाते हैं। तीन हफ्ते तक टेस्ट ठीक है तो तीन हफ्ते के बाद आर्टिफिशियल पेन देकर बच्चे की डिलीवरी करवा देते हैं। उसका ऑपरेशन कर बच्चा इसलिए नहीं निकालते कि महिला के दोबारा प्रेग्नेंट होने में किसी तरह की दिक्कत न हो। वैसे अगर यह प्रोफाइल टेस्ट ठीक है तो तीन हफ्ते तक महिला के शरीर में जहर फैलने की संभावना कम रहती है। हां, अगर प्रेग्नेंट महिला के गर्भ में बच्चे की डेथ हो गई है और उसे कोई दिक्कत हो रही है तो उस स्थिति में तुरंत ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकाल देते हैं। महिला को हाई बीपी की दिक्कत हो रही है, उसके पेट में दर्द हो रहा है। या तेज बुखार हो रहा है तो मामला गंभीर हो जाता है। कई बार महिला के पेट में ब्लीडिंग या लीकेज होना शुरू हो जाती है। इससे बेबी को फीडिंग नहीं मिलती, जिसकी वजह से मौत होने की संभावना रहती है। अगर ऐसा कुछ हो रहा है, डॉक्टर को तुरंत ऑपरेशन कर बेबी को बाहर निकाल देना चाहिए।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours