जनता को मुर्ख बना पनप रही है गंदी राजनीति
रोहित कुमार
इन्साफ एक्सप्रेस
आज की राजनीति सिर्फ एक गटर के सिवा कुछ नहीं है जिस में हमारी जनता को अपने सपनों और नेताओं दुवारा किये गए वादों को ढूंढने के लिए उतार दिया जाता जाता ,हर बार जब भी चुनाव नज़दीक आते हैं नेताओं दुवारा लाखों दुवारा अपने गुणगान में लगा दिया जाता है जिस की चमक जितनी ज़यादा होती है आम जनता उस के पीछे बिना कुछ समझे भेड़-बकरियों की तरह चलना शुरू कर देती है,जनता की ऐसी मुर्खता का सब से बड़ा कारन है जनता तक गलत सूचनाओं का जाना जिस में इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा शामिल होता है ,जो ऐसे नंगी मानसिकता के राजनेताओं से विज्ञापन के नाम पर पैसे ले कर उन का गलत प्रचार का हिस्सा बन जाते हैं ..जिस से आम जनता अपने अच्छे और बुरे के बारे में नहीं जान पाती क्यूंकि हमारे देश में पत्रकारिता को एक धर्म माना जाता है जिस का लोग विश्वास करते हैं लेकिन कुछ मीडिया वालों की तरफ से गलत और पेड ख़बरें दिखा कर आम जनता को एक ऐसा नेता चुनने पर मजबूर कर दिया जाता है जिस का आम जन की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं होता है,हमारे देश में पार्टी चाहे कोई सी भी हो आम जनता से झूठ बोलने में पीछे नहीं हटती,नौजवानों की नौकरियों की बात की जाये या उन को कोई अच्छा रोज़गार देने की ,जिस भी नेता और पार्टी के पास सब से ज़यादा लुभावने सपनों की सूचि होगी उस का जीतना तह माना जाता है,एक पार्टी दूसरी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती नज़र आती है इस का मतलब तो येही हुआ न कि राजनेतिक पार्टी कोई भी हो भ्रष्ट नेता ही आप का कल्याण करने के लिए ही आगे आएगा आम जनता को धर्म,पार्टी,जाती और अंधविश्वास से उपर उठ कर देश हित में ही वोट डालना चाहिए जिस से एक अच्छा नेता उभर कर सामने आए,लेकिन ऐसा होना नामुमकिन है क्यूंकि हमें सपने देखने की आदत हो गई है हकीकत से हम लोग काफी दूर होते जा रहे हैं इसी बात का फायदा कुछ नेता उठा कर आप को बड़े बड़े और लुभावना सपना दिखा कर मुर्ख बना देते हैं,हमारे देश की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है वैसे वैसे बेरोज़गारी बढ़ रही है और जीवन जीने के साधन कम होते जा रहे हैं हमारे देश को बुलेट ट्रेन और बड़े बड़े शौपिंग माल का सपना दिखा इस बात से दूर किया जा रहा है कि आज भी हमारे देश में गरीबी और बेरोज़गारी अपने पुरे चरम पर जा रही है लोग भूख से मार रहे हैं लड़कियों के आये दिन बल्त्कारों की संखिया बढ़ रही है किसान पानी की कमी की वजह से नुक्सान में जा रहा है,किसान कर्ज़े के बोझ तले दबता जा रहा है बच्चों की शिक्षा महंगी होती जा रही है सरकारी स्कूल पर सरकारों दुवारा दिहान नहीं दिया जा रहा है भिखारी देश में लगभग हर चुराहे पर नज़र आते हैं लोगों की समस्याओं को दूर करना तो बहुत परे की बात लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए भी नेताओं के पास वक्त नहीं निकलता,आम जनता की सुरक्षा की बात नहीं की जाती आज भी पुलिस थानों में सिर्फ उस की सुनवाई होती है जिस के पहनावे ने उस को रुस्ख्दार लोगों की सूचि में खड़ा कर दिया हो गरीब आज भी थानों में इन्साफ के लिए बिलकता हुआ नज़र आता है,लेकिन जैसे ही चुनाव आ जाते हैं तो सब से पहले येही नेता अपना घर छोड़ गरीब लोगों के घरों में वोट मांगते नज़र आते हैं इन नेताओं के दफ्तरों में शराब सरेआम परोसी जाती है वोटरों को लुभाने के लिए नेता किसी भी हद तक जाने को मान जाते हैं चुनाव के मोस्सम में नेता या उस के कारिंदे दुवारा किसी भी वोटर को नाराज़ नहीं किया जाता और लाखों रुपया पानी की तरह भा दिया जाता है अब सोचने वाली बात यह आती है कि जिस ने करोड़ों लगा चुनाव जीता होता है वो आम जनता से सहयोग करेगा या फिर अपने चुनाव में  खर्च किये गए पैसों को पूरा करने का जुगाढ़ करेगा इसी लिए हमारे देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है आम जनता को अपना नेता सिर्फ उस को ही चुनना चाहिए जो उन की समसियाओं के निवारण के लिए काम कर सके और सरकार को भी सब से पहले आम जन की समस्या,नौजवानों में बढ़ रही बेरोज़गारी,महिलों की सुरक्षा और शिक्षा पर काम करना चाहिए जिस से देश की पहचान पूरी दुनिया में हो सके और हमारी जनता को भी मुर्खता से बाहर निकल कर देश और अपने प्रति सोचन होगा जिस से कोई ऐसा नेता आप पर न बेठ जाए जिस को आप सिर्फ चुनाव के मोसम में ही देख पाओ,



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