शराब का सेवन और सरकारों का दोगलापन 


रोहित कुमार

इन्साफ एक्सप्रेस
हमारे देश में कुछ ही प्रदेशों को छोड़ कर शराब को बेचने को क़ानूनी मान्यता है जो प्रदेश और केंद्र सरकारों दुवारा दी जाती है एक तरफ तो प्रदेश सरकारें इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में करोड़ों रूपये के विज्ञापन दे कर नशा मुक्त समाज बनाने का वादा करते हैं और दूसरी ओर सरकार ही नशे (शराब) को सरकारी मान्यता भी प्रदान करती है मैं ने तो यह सुना है “ ज़हर तो ज़हर ही होता है ” चाहे कम हो या ज़यादा मतलब सरकार जनता को पूरी तरह से या तो मुर्ख समझती है या मुर्ख बना रही है क्यूंकि क्राइम रेट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ होने वाले ज़यादातर क्राइम शराब के सेवन की वजह से ही होते हैं एक पत्रकार होने के नाते मैं ने भी ज़यादातर महिलाओं के खिलाफ हो रही घरेलू हिंसा शराब के सेवन की वजह से देखी है देश में बढ़ रहे बलत्कार के मामले में भी कहीं न कहीं सरकारों द्वारा बेची जा रही शराब ही है किसी भी प्रदेश की सरकार शराब के ठेकों की नीलामी से करोड़ों रुपये डिकार लेती है लेकिन एक बार भी यह नहीं सोच पाती कि इस शराब ने भी कई घरों के दीपक भुझा दिए हैं एक बात की समझ नहीं आती कि नशा तो नशा ही होता है तो करोड़ों रूपये विज्ञापनों में झोंक कर क्यूँ आम जनता का टैक्स में दिया गया पैसा बर्बाद किया जा रहा है  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो या प्रिंट मीडिया कभी किसी ने एक पत्रकार होने के नाते सरकार से सवाल नहीं पूछा और न ही कभी किसी न्यूज़ चैनल ने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की है कि किस तरह आम जनता इस शराब के सेवन से मर रही है बीमारियाँ इन लोगों को अंदर ही अंदर खा रही हैं क्यूंकि न्यूज़ चैनलों को सिर्फ इस बात की परवाह है कि उन को इस मुद्दे से टी,आर,पी नहीं मिलेगी लेकिन मैं सरकार से यह बात पूछना चाहता हूँ कि क्यूँ सरेआम इस नशे को बेचा जा रहा जबकि सब को पता है कि शराब का सेवन कैंसर,लीवर कैंसर जैसी बिमारियों को आमंत्रित करता है शराबी नशे की हालत में अपने घर वालों को परेशान करते हैं जिस से घरलू हिंसा का जनम होता है जो आगे चल कर किसी विकराल क्राइम का रूप धारण कर लेती है लेकिन सरकारों को सिर्फ जनता को मुर्ख बनाना आता है हमारी जनता भी किसी से कम नहीं है इन को भी इस नशे से कोई लेना देना नहीं है बस घर में बेठ कर यह कहना बहुत आसन लगता है कि कोई नशे की हालत में किसी लड़की का बलत्कार कर के चला गया धुत्कार है ऐसी दोगली जनता और सरकारों पर जो सरे आम ऐसे नशों को बेच रही हैं जिन के सेवन से कैंसर जैसी जान लेवा बिमारी लग जाती है बहुत से प्रदेशों में लोग कई बार शराब के सेवन की वजह से ही मौत को गले लगा लेते हैं सरकार दुवारा दिए गए शराब के ठेकों के अलावा कुछ मृत ज़मीर लोग भी मोटी  कामाई के लालच में नकली शराब को बेचते हैं जिस से कई लोग मारे जाते हैं इन सब मौतों की ज़िम्मेदार सरकारें ही होती हैं शराब का सेवन कई पारिवारिक और सामाजिक बुराइयों को उत्पन करता है शराब इंसान को शरारिक और भाव्नात्मिक रूप से खतम करती है शराब के सेवन से लगने वाली बीमारियाँ कुछ इस परकार हैं :
पेट में सुजन का हो जाना,भूख लगना कम हो जाती है,लीवर में सुजन आ जाती है,लीवर में फैट का एकत्रित होना,लीवर पर फैट होने की वजह से पेट में पानी एकत्रित हो जाता है,पीलीया हो सकता है,खून की उलटी हो सकती है,कैंसर भी हो सकता है,शारीर में एसिड लेवल बढ़ जाता है,
इन सब बिमारियों के बारे में भी सरकारों को सोचना होगा और पंजाब जैसे राज्य को भी शराब मुक्त बनाना होगा जिस से पंजाब एक स्वस्थ राज्य बन के उभरे और सरकारों को अपनी दोगली पॉलिसियों को बदलना होगा      
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