जनता और नेता

रोहित कुमार
इन्साफ एक्सप्रेस
हमारे देश में जैसे ही चुनाओं का बिगुल बजता है वैसे ही एक उम्मीद की किरण हमारी जनता के बीचा जाग उठती है कि कोई तो ऐसा होगा जो अब हमारी मुश्किलों और समस्याओं का समाधान करेगा और हम एक पार्टी के नेता को मनोमन चुन भी लेते हैं और यह आशा करते हैं कि अब की बार अच्छे दिन ज़रूर आयेंगे हम चुनाव शुरू होने से ले कर खतम होने तक नेता और उस के चकाचोंद कर देने वाले वादों के बीच अपनी एक अलग दुनिया बना लेते हैं हम नेताओं के लिए पार्टी के लिए चुनाव के समय कई बार अपने करीबी दोस्तों तक को नाराज़ कर देते हैं लड़ाई झगड़े होते हैं लेकिन जैसे ही चुनाव का शोर खतम होता है तो नेता तो दूर उस का कुत्ता भी आप के पास नहीं आता जिस से कई लोगों का मन टूट जाता है लेकिन इस सब से चुनी गई सरकार को कोई मतलब नहीं होता क्यूंकि वो जानते हैं कि चुनाव खतम तो अब किसी से क्या लेना देना ....यह सिस्टम जब हमारा देश आज़ाद हुआ है तब से चलता आ रहा है सरकारें बदलती रहती हैं नेता बदलता रहता है लेकिन हमारी जनता की सोच और नेता से दिल लगी का रुझान आज तक नहीं बदला ..नेता जी जीतने के बाद कुछ दिन घर में आराम करते हैं उस के बाद अपने रोजाना के कामों में वेयस्त हो जाते हैं और जनता भी कुछ दिन नेता की चुनाव के समय दिलदारी की बातें करता हुआ यह सब भूल जाता है और जब उस के मन मताबिक काम नहीं होते उस की समस्या का निवारण नहीं होता तो नेता को कोसता हुआ अगले चुनाव का इन्तिज़ार करने लगता है ऐसे ही आज हमारे देश को 70 साल निकल गए लेकिन न तो सरकारों ने जनता की समस्याओं को समझने की कोशिश की और न ही जनता ने देश हित या अपने हितों के लिए कुछ करने का सोचा हर चुनावों की तरह नेता धर्मिक,जातीवाद,पार्टी के नाम पर आम जनता का इस्तेमाल कर गायब हो जाता है और रह जाती तो बस उस नेता की छोड़ी गई नफरत जो आने वाले अगले 5 सालों तक आपसी भाई चारे को चिर्मराए रखती है..किसी भी शहर में चले जाओ वहाँ पर एक कच्ची बस्ती ज़रूर मिलेगी जहाँ पर हजारों बेरोजगार,गरीब लोग इस उम्मीद में अपनी नस्लों को बर्बाद करते हुए आ रहे कि उन को पक्का घर गैस का कनेक्शन ज़रूर मिलेगा वो इसी उम्मीद में अपनी आखरी साँस तक यह सोचते रहते हैं कि अब कोई नेता मसीहा बन कर उन की गरीबी और दुखों को दूर करने आएगा लेकिन हर बार की तरह सिर्फ अच्छे दिन के वादे लुभावने सपने और गरीबी ही इन बेसहारा लोगों के पास रह जाती है सरकारें बनती हैं चली जाती हैं लेकिन इन गरीब लोगों का कभी कोई दुःख तो दूर कभी कोई सरकारी कर्मचारी इन की समस्या तक नहीं सुनता... देश की उन्नति में में इन गरीब मजदूर लोगों का बहुत बड़ा योगदान होता है देश में बन रहे बड़े बड़े माल,सडकें बनाने के लिए इनी मजदूर और गरीब लोगों को धेकते हुए तारकोल में झोंका जाता है फिर इन की समस्याओं को क्यूँ नहीं सुना जाता अब तो देश की एक बड़ी आबादी का यह गरीब हिस्सा इसी तरह रहने के लिए मजबूर और आदि हो गया है किसी भी चुनी गई सरकारों को इन के पुनर्वास के लिए आगे आना होगा इन की शिक्षा और सेहत पर काम करना होगा ताकि देश की रीढ़ की हडी यह लोग अपना जीवन स्वछता और शिक्षित हो कर बतीत कर सकें......














  


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