बलात्कार के बड़ते आंकड़े ,और भारत की इंसानियत
बलात्कार पर संवेदनहीन समाज


रोहित कुमार 


भारत देश में बढ़ रहे बलात्कार के मामलों को ले कर भारतियों में भाजपा सरकार के खिलाफ नाराज़गी और रोष नज़र आ रहा है उन्नाव और हैदराबाद रपे ने पुरे देश को झंझोड़ कर रख दिया है कुछ साल पहले निर्भेया बलात्क्कर के बाद दिल्ली में दश वासियों ने कैंडल मार्च निकाला था जिस से लग रहा था कि हमारा समाज अब जाग गया है और हवस के पुजारियों में कानून का कुछ खौफ आएगा लेकिन हुआ इस के बिलकुल उल्ट ,जहाँ एक तरफ बलात्कार के मामलों में बढ़ोतरी हुई है वहां अभी तक किसी भी बलात्कारी को उस की सजा नहीं मिल पाई है शायद येही कारण है कि इंसानियत की खाल में भेड़िये लगातार भारत में बलात्कार जैसी घिन्होनी वारदातों को अंजाम देते आ रहे हैं और उन के अंदर से कानून का खौफ मानो जैसे खतम सा हो गया है ,निर्भेया रपे के बाद देश में काफी कानून को सख्त किया गया लेकिन फिर भी भारत से रपे के मामले कम नहीं हो रहे हैं ,भारतीय सांसद में एक तरफ आज कल एक एन,आर,सी को ले कर मद्दा बहुत गरमाया हुआ है,और दूसरी और भाजपा मंत्री सिर्फ अपनी ही धुन में चलते जा रहे हैं मानो जैसे उन को देश में हो रही घटनाओं से कोई सरकार न हो,अं ने हमेशा सोशल मीडिया का मुख्या धारह के मीडिया से तुलना नहीं की है और हमेशा सोशल मीडिया को कमतर समझा है लेकिन आज देश का मीडिया इस तरह चुप बेठा है जैसे इन को कोई सांप सूंघ गया हो ,हमारा देश में आये दिन बाप अपनी बेटी से,बीटा अपनी माँ से,रपे कर रहा है लेकिन हमारे मीडिया के पास सिर्फ पाकिस्तान और हिन्दू मुस्लिम के सिवा डिबेट करने को कुछ नहीं है लेकिन आज सोशल मीडिया मुख्या धारह में आ चूका है और लोगों की समस्याओं सरकार के बंद पड़े कानों तक पहुंचा रहा है शर्म आणि चाहिए हुमर्रे मीडिया को जो देश के लोगों को हिन्दू उस्लिम में बाँटने में कामयाब हो चुके हैं आज से 6 साल पहले तक किसी को नहीं पता था कि हिन्दू मुस्लिम क्या है सब प्यार के बंधन में बंधे हुए एय बढ़ रहे थे लेकिन हमारे देश के कुछ छोटी मानसिकता के एंकरओं ने देश को जातिवाद में बाँट दिया जब भी टी,वी पर न्यूज़ चैनल लगाओ यह तथकित्त पत्रकार हमेशा पाकिस्तान में क्या हो रहा है आज किस मुस्लिम ने हिन्दू को आली दी है कहाँ पर हिन्दू से छेड़छाड़ हुई है कितने मुलिम और हिन्दू आपस में लड़ रहे हैं मंदिर कहाँ बनेगा अकबर ,बाबा ने हिन्दुओं के साथ क्या किया इस सब को एक विशेष जाती के साथ जोड़ कर आज देश को इस कगार पर ला कर खड़ा कर दिया है जहाँ से मासूम बेटियों की आवाज़ सरकार के कानों तक नहीं जा रही है ,हमारे मीडिया ने सब से आगे,सब से तेज़ का नारा दे कर सब से जल्दी देश को कई हिस्सों में बाँट दिया है सरकार से सवाल न पूछ कर पिछले 70 सालों में क्या हुआ वो दिखाया जा रहा है देश में बढ़ रहे बलात्कार पर डिबेट नहीं हो रही है बढ़ रहे बलात्कारों पर चिंता नहीं की जा रही बल्कि हमारी जनता को हिन्दू मुस्लिम की लड़ाई दिखा यह समझया जा रहा है कि हमारे बीच में उन्नति और प्यार क्यूँ है इस को जल्द से जल्द खतम करो ताकि सब से पहले और सब से तेज़ खबर हम जनता तक पहुंचा सकें अखबार हों या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सब के सब भाजपा सरकार के दम हिलाने वाले कुत्तों की तरहं काम कर रहे हैं जिस से आम जनता का नुक्सान हो रहा है क्यूँ नहीं डिबेट हो रही कि आज हमारे देश में सब से ज़यादा रपे हो रहे हैं और किसी भी बलात्कारी को अभी तक फँसी पर नहीं टांगा गया है आज समृति इरानी को राहुल गाँधी की इस बात से गुस्सा आ गया है कि राहुल गांधी ने "रपे इन इंडिया " बोला लेकिन आज तक समृति इरानी ने कुलदीप सेंगर,चिन्मयानंद,आसा राम,राम रहीम,भोजपाल सिंह,जयेश पटेल,विजय जॉली,कश्मीरा अनिल भोसले ,वेंकटेश मौर्य,हामिद सरदार,निहाल चंद,प्रमोद गुप्ता जैसे भाजपा नेताओं को माफ़ी मांगने की बात क्यूँ नहीं की और उन को सजा जल्द से जल्द दिलाने की बात क्यूँ नहीं की ,येही कारण है कि आज ताकतवार लोगों को हमारे देश में हेवानियत दिखाने का मौका मिल रहा है हमारा देश आज उस जगह खड़ा है जहाँ मुझ जैसे पत्रकार भी यह सोचने को मजबूर हैं कि भगवान का शुकर है कि मेरे घर में बेटी पैदा नहीं हुई ,धुत्कार हमारे देश के मीडिया पर जिन को सिर्फ भारत में सिर्फ एक ही मुद्दा मिल रहा है जो सिर्फ हिन्दू मुस्लिम से जुदा हुआ होता है क्यूँ कि उस से न्यूज़ चैनल की टी,आर,पी बढ़ जाती है हमारे मीडिया से कोई सवाल नहीं पूछता क्यूंकि हमारा मीडिया बेशरमी और बेगरती की चादर उढे बेठा है सरकार को सब से पहले एक ऐसा कानून ले कर आना चाहिए जिस से बलात्कारियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके और एक ऐसा खौफ इन भेड़ियों के दमाग में हो कि यह बलात्कार के नाम से भी कांपें लेकिन इस देश की विडम्बना है कि सख्त कानून तो तब बने जब पक्ष विपक्ष में छुपे ऐसे भेड़िये सरकार का हिस्सास न हों अब वक्त आ गया है कि समाज को एक जुट हो कर इस समस्या का हल ढूँढना होगा और समाज को बेटियों के अधिकारों और इज्ज़त के लिए जारुक करने का अभियान चलाना चाहिए जिस से कुछ तो समाज में सुधार होगा और हमारी सरकारों और मीडिया की आंखें खुलेंगी ,आप सब को चाहिए कि ऐसे बेशरम मीडिया और देश में आपसी भाई चारे को ख़राब करने वाले लोगों से दुरी बना ली जाए तो देश कहीं न कहीं सुधर सकता है अमित शाह को अगर कोई कानून लाना ही है तो कम से कम महिला सुरक्षा व शिक्षा पर ले कर आयें जिस से हमारे देश में महिलाओं की सुरक्षा को दिन रात सुनश्चित किया जा सके,

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