चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदरर सिंह ने रविवार को गेहूं की खरीद को कोरोना संक्रमण से मुक्त बनाने पर जोर देने के अलावा किसी भी तरह की ढील से साफ इनकार किया है। उनके आदेश के मुातबिक राज्य में 3 मई तक किसी किस्म की कोई ढील नहीं दी जाएगी। यहां तक कि रमजान के दौरान भी किसी भी तरह की कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी। मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमिश्नरों को सभी जिलों में कर्फ्यू का सख्ती से पालन करवाने के आदेश दिए हैं।
यह थी उम्मीद, जो नहीं होंगी पूरी
दरअसल, लॉकडाउनके फेज-2 का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल को कुछ चीजों में छूट देने के संकेत दिए थे। अब उम्मीद लगाई जा रही थी कि पंजाब में भी देशभर की तरह सभी तरह के उद्योगों व निर्माण गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति दे जाएगी। हाईवे किनारे स्थित ढाबों, एयर कंडीशनर, कूलर व पंखे और इन्हें रिपेयर करने वाली दुकानों को खोलने की भी मंजूरी दी जाएगी। स्टोन क्रशर, रेत, सीमेंट और स्टील की बिक्री की भी इजाजत मिल सकती है वहीं निर्माण सामग्री की ढुलाई के लिए ट्रांसपोर्ट को भी छूट मिलेगी। ऐसा कुछ नहीं हुआ। पंजाब में किसी भी तरह की कोई छूट नहीं है। 
मुख्यमंत्री ने सिविल और पुलिस प्रशासन के सीनियर अधिकारियों के साथ मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के बाद यह फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमिश्नरों को आदेश दिए कि इस दौरान किराना और अन्य जरूरी वस्तुओं की दुकानों पर भीड़ इकट्‌ठी न होने को यकीनी बनाने के अलावा देह से देह की दूरी के नियम का सख्ती से पालन करवाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा देश में 20 अप्रैल से गैर-सीमित वाले ऐलाने गए जोनों के लिए ढील देने के पृष्ट्ठभूमि में महत्व को स्वीकार करता है। हालांकि जमीनी हकीकत संबंधी विचार-विमर्श करते हुए मुख्यमंत्री का दृढ़ विचार है कि उनकी सरकार द्वारा गेहूं की कटाई और खरीद कार्यों के साथ-साथ विभिन्न औद्योगिक गतिविधियां जैसे भट्ठे और निर्माण गतिविधियां, जहां प्रवासी मजदूरों के रहने की व्यवस्था है, से संबंधित पहले किए गए ऐलानों को छोड़कर कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए।
केंद्रों के सेहत ऑडिट करने का आदेश, अगले हफ्ते आएगी रिपोर्ट
मंडियों में सफाई की स्थिति न होने की चिंताओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने इन केंद्रों के सेहत ऑडिट करने के आदेश दिए। यहां 1.85 लाख मीट्रिक टन गेहूं जून तक आने की संभावना है, जब तक खरीद पूरी नहीं हो जाती। इस पर करीब 35,000 करोड़ रुपए का ख़र्च आएगा, जिसमें राज्य को केंद्र द्वारा सीसीएल भुगतान के लिए मिले 26,000 करोड़ रुपए शामिल हैं। इससे कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई प्रभावशाली ढंग से लड़ने के लिए बड़ी मदद मिलेगी। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि इस समय सभी कोशिशें जिंदगी बचाने के लिए केंद्रित कर दी जानी चाहिए और कोविड-19 मुक्त माहौल में निर्विघ्न और सुचारू खरीद प्रबंध किए जाएं। आने वाले समय के लिए कोई भी फैसला 3 मई के बाद लिया जाएगा, जो उस समय की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य को इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए बनाई गई माहिरों की कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। संभावना है कि यह कमेटी अपनी रिपोर्ट अगले हफ्ते देगी।
आपदा प्रबंधन कानून के तहत होगी कार्रवाई
इस दौरान मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों पर अमल करते हुए राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों द्वारा अपने-अपने जि़लों में कर्फ्यू को सख्ती से लागू करने के लिए अलग नोटिफिकेशन जारी किए जा रहे हैं। इन नोटीफिकेशनों के अनुसार आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन कानून 2005 और आईपीसी 1860 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत आपराधिक केस दर्ज किए जाएंगे।
टोल प्लाजा पर वसूली नहीं करने को 3 मई तक बढाया
पंजाब के लोक निर्माण मंत्री विजय इंदर सिंगला ने सभी स्टेट टोल प्लाजा पर टोल लेने पर लगी रोक को 3 मई तक बढ़ा दिया है। उन्होंने बताया कि 27 मार्च को वसूली प्रक्रिया को तालाबंदी के चलते तय समय सीमा तक के लिए रोक दिया गया था, लेकिन अब टोल प्लाजा 3 मई तक बंद रहेंगे, क्योंकि कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए देशव्यापी तालाबंदी को भी बढ़ा दिया गया है। पंजाब में राज्य सरकार अधीन 23 टोल प्लाजा चल रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के आदेशों के बाद एनएचएआई के अधीन आते टोल प्लाजा पर 20 अप्रैल से वसूली शुरू कर दी जाएगी, जहां रोज़ाना यात्रियों को टैक्स अदा करना पड़ेगा। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि मुफ्त़ चुंगी मुहैया कराने के साथ राज्य सरकार के अधीन चल रहे टोल प्लाजा 3 मई तक चालकों को लंगर (मुफ़्त भोजन) देते रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि तालाबंदी के कारण सड़क के साथ लगते ढाबे और रेस्टोरेंट बंद थे, लेकिन राज्य सरकार एमरजेंसी सप्लाई करने वाले वाहनों के चालकों को पका हुआ भोजन मुहैया करवा रही है।
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