कलयुग के इस दौर में यूं तो हर रोज इंसानियत को शर्मसार होना पड़ रहा है पर आज मैं जिस घटना के बारे में जिक्र करने जा रहा हूं वह सुन कर अगर आपके अंदर का सोया हुआ इंसान नहीं जागता तो धुत्कार है ऐसी इंसानियत पर धुत्कार है ऐसी दुनिया पर । केरल के मल्लपुरम में कुछ क्रूर और शरारती तत्वों ने मिलकर एक गर्भवती हथनी को एक अनानास के अंदर पटाखे डालकर खिला कर तड़पा तड़पा कर मार डाला इस अमानवीय घटना को देखने के बाद इंसान के लिए इंसान शब्द का प्रयोग करने के लिए रूह नहीं कर रही इंसान इंसानियत को खोकर इस कदर इतना नीचे गिर सकता है यकीन नहीं होता । इंसान की हैवानियत चरम सीमा को पार कर चुकी है इंसान अपने मनोरंजन और स्वार्थ के लिए कुछ भी कर रहा है जिनको सोचने से रूह कांप उठती है वह काम आज असलियत में हो रहे हैं कुदरत के साथ छेड़छाड़ का इंसान को बहुत भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है ,इंसान को कुदरत का बिल्कुल भी खौफ नहीं है कुदरत कोरोना वायरस जैसी महामारी के द्वारा इंसान को बार-बार उसकी कुंभकरण निंद्रा से उठाने की कोशिश कर रही है पर इंसान बिल्कुल भी इस बात को समझने की कोशिश नहीं कर रहा । इसके लिए जिम्मेवार कौन है यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है बीते समय में इस प्रकार की अमानवीय घटनाएं तब जन्म लेती थी जब प्रजा में राजा का खौफ खत्म हो जाता था क्या लोकतंत्र और प्रशासन का ऐसे क्रूर लोगों को कुछ भी डर नहीं है जहां पर यह घटना घटी है वहां पर बताया जा रहा है कि इस जुर्म की सजा मात्र 3 महीने है मेरी सरकार से अपील है कि ऐसे क्रूर लोगों को भयंकर से भयंकर सजा देनी चाहिए जरूरत पड़ने पर सजा के नियम में संशोधन करके सजा की अवधि को और बढ़ाया जाना चाहिए और जुर्माना लगाया जाना चाहिए । इंसान को यह बात अच्छे से जान लेनी चाहिए कि कुदरत के साथ छेड़छाड़ का खामियाजा हमें कितना भुगतना पड़ रहा है और कितना और अधिक भुगतना पड़ सकता है प्रकृति पशु पक्षी जानवर यह हमारे जीवन का आधार है इनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती मेरी सरकार से अपील है कि इस अमानवीय घटना के प्रति उचित कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा जन्म ना ले ,(जय हिंद जय भारत कुलविंदर सहगल 708 7924146)

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