जालंधर. कोरोना संकट के बीच इस बार सूबे के शिक्षण संस्थानों में वोकेशनल कोर्सेस की डिमांड 35 प्रतिशत तक बढ़ गई है। पिछले कुछ वर्षों से पंजाब के कॉलेजेस में कई पाठयक्रम की सीट खाली रह जाती थीं, क्योंकि सूबे से हर साल करीब 1 लाख बच्चे हायर स्टडी के लिए विदेश चले जाते थे पर इस बार ऐसा नहीं हुआ।
दूतावास बंद हैं, वीजा और इमीग्रेशन संबंधी प्रोसेस न के बराबर हो रहे हैं। दूसरी तरफ, अभिभावक भी हालात सामान्य होने तक अपने बच्चों को विदेश नहीं भेजना चाहते। ऐसे में स्टूडेंट्स 6 महीने से लेकर वन इयर डिप्लोमा वाले कोर्सेसे में दाखिला ले रहे हैं। मकसद, पढ़ाई में गैप न हो और कोर्स के बाद सर्टिफिकेट मिल जाए ताकि 2021 के जनवरी या मई के सत्र में विदेश के लिए अप्लाई कर सकें। 
नंबर फैक्ट्स
  • 01 लाख बच्चे हर साल हायर स्टडी के लिए सूबे से विदेश चले जाते हैं।
  • 80% स्टूडेंट्स 12वीं के बाद हायर एजुकेशन के लिए जाते थे विदेश।
  • 80 हजार जालंधर के स्टूडेंट्स मई में हर साल कनाडा जाते हैं।
  • 90% एन्क्वायरी  मई-जून में हायर स्टडी के लिए इमीग्रेशन कंसल्टेंट्स के पास आती थी।
  • 10% एन्क्वायरी   ही मई-जून में कोरोना के कारण इमीग्रेशन कंसल्टेंट्स के पास आई।
कुकिंग, रिटेल मैनेजमेंट, वीएफएक्स और एनिमेशन की मांग ज्यादा
वोकेशनल कोर्सेस में सबसे ज्यादा मांग ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट, एंबुलेंस असिस्टेंट, कुकिंग, मेकअप आर्टिस्ट, रिटेल मैनेजमेंट, वीएफएक्स और एनीमेशन की है। इन कोर्सों की विदेशों में भी मान्यता है। इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स के अनुसार मई-जून में 12वीं के 90% छात्र-छात्राएं हायर एजुकेशन के लिए कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूके के कॉलेजेस की इनक्वायरी के लिए आते थे, लेकिन इस बार यह प्रतिशत 10% ही रह गई है। 
मई इंटेक में ही 50 हजार स्टूडेंट्स चले जाते हैं विदेश, इस बार नहीं गए
इमिग्रेशन कंसल्टेंट के मुताबिक सूबे से हायर स्टडी के लिए दो इंटेक में स्टूडेंट्स विदेश जाते हैं। जनवरी और मई। मई इंटेक में करीब 50 हजार स्टूडेंट्स कनाडा,यूके, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जाते हैं। पंजाब से सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स कनाडा ही जाते हैं। इनमें दोआबा रीजन से ही सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल होते हैं। जालंधर से करीब 80 हजार स्टूडेंट्स कनाडा, 15 हजार यूके और 2 हजार स्टूडेंट्स अमेरिका जाते रहे हैं।
2 साल में कनाडा में 5 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया, इनमें 1.25 लाख पंजाबी
कनाडा सरकार की उदार नीतियां और पढ़ाई के दौरान जॉब और पीआर (परमानेंट रेजिडेंस) की सुविधा के चलते  पंजाब के युवाओं की पहली पसंद कनाडा है। कनाडा के 200 से अधिक कॉलेजों ने अपने द्वार अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए खोल रखे हैं। पंजाबी युवा इस अवसर का पूरा लाभ उठा रहे हैं। पिछले दो साल में कनाडा में 5 लाख विदेशी छात्रों ने पंजीकरण कराया है, जिसमें से 1.25 लाख पंजाबी हैं।
वोकेशनल काेर्स बढ़िया विकल्प, विदेश में भी है मान्यता, प्रचार-प्रसार से दाखिला और बढ़ सकता है 
बठिंडा के वरिष्ठ शिक्षाविद प्रोफेसर एनके गोसाईं कहते हैं, ‘इस बार कोरोना के चलते सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया है। पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। अच्छी बात यह है कि इस बार वोकेशनल कोर्सेस की डिमांड में करीब 35% का इजाफा हुआ है। विदेश जाने वाले स्टूडेंट्स की पढ़ाई में गैप नहीं आएगा। इन कोर्सों की विदेशों में भी मान्यता है। सरकार यदि इन कोर्सों का प्रचार-प्रसार करें तो दाखिले में और इजाफा हो सकता है।’
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