अमृतसर I अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के शव बदलने के मामले में मृतक प्रीतम सिंह का परिवार अस्पताल के खिलाफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट पुहंच गया है। मुकेरियां के गांव टांडा राम सहाय के मृतक प्रीतम सिंह के पोते प्रितपाल सिंह ने रविवार को दावा किया कि उनका परिवार रजिस्ट्रार से बात कर हाईकोर्ट में रिट फाइल कर रहा है। रिट में दावा किया है कि उनके दादा का अस्पताल में कत्ल हुआ है।
कोर्ट से कत्ल की धारा 302 व सबूत मिटाने की धारा 201 के तहत केस दर्ज करने की अपील की गई है। उन्होंने कहा, करीब 5 दिन पहले भी अस्पताल ने उनके दादा प्रीतम सिंह की मौत की खबर दी थी लेकिन चाचा दलवीर सिंह के विरोध जताने पर उसी समय कहा कि उनके दादा ठीक हैं।
प्रितपाल सिंह ने बताया कि जिस महिला पदमा का शव यहां पर पहुंचा उनके परिवार वालों के साथ उनकी बातचीत हुई है और उन्होंने श्मशानघाट की वह रसीद भी उन्हें भेजी है, जिसमें उस महिला का नाम दर्ज है। वहीं अमृतसर प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने जांच टीम बना दो स्टाफ नर्सें व दो मल्टी टास्क वर्कर सस्पेंड कर दिए हैं।
कार्रवाई:  मामले के मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए

अमृतसर जिला प्रशासन ने एसडीएम शिवराज सिंह बल की अध्यक्षता में घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं तो सरकारी मेडिकल कॉलेज तथा अस्पताल प्रबंधन की ओर से तीन मेंबरी डॉक्टरों की टीम को भी जांच का जिम्मा सौंपा गया है। फिलहाल दोनों जांचों में दो दिन के भीतर रिपोर्ट दिए जाने को कहा गया है। इस बीच अस्पताल प्रबंधन ने 2 स्टाफ नर्स तथा 2 मल्टी टास्क वर्कर (दर्जा चार मुलाजिम) को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया है।
कर्मचारी यूनियन का आरोप: डॉक्टर, अफसरों ने खुद को बचाया, संघर्ष करेंगे

अस्पताल प्रबंधन की कार्रवाई के खिलाफ दर्जा तीन व दर्जा 4 यूनियनों ने संघर्ष का एलान कर दिया है। डॉक्टरों अफसरों ने खुद को बचाते हुए यह कार्रवाई की है, जिसका डट कर विरोध होगा। यूनियन नेता नरिंदर सिंह ने कहा, मौत की पुष्टि करना, उसे पैक कर माॅर्चरी में भेजना, आगे संस्कार के लिए ले जाना या फिर परिवार वालों को सौंपना डॉक्टरों का काम है, न कि स्टाफ नर्स या दर्जा चार मुलाजिमों का।
नरिंदर सिंह व नर्सिंग यूनियन की दिलराज कौर ने बताया कि उनके लोग कोरोना काल में जान जोखिम में डाल फ्रंट पर लड़ रहे हैं। शव बदले जाने के मामले में अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है। यूनियन ने अमृतसर व पटियाला में काम बंद करने की चेतावनी भी दी है।
महिला का भी अंतिम संस्कार हुआ... बकौल प्रितपाल रात 11 बजे उस महिला का शव मुकेरियां के शव गृह में रखा गया। उन्होंने हैरानी जताई कि महिला का शव रखा, वहां कहीं भी यह बात रिकाॅर्ड में नहीं लाई गई कि यह शव बदल कर आया है। उन्होंने अपने तौर पर अपने हाथों से वहां के रजिस्ट्रर पर एंट्री की और तमाम बातें लिखी। आज अमृतसर में महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पहले भी विवादों में रह चुका है अमृतसर का जीएनडी अस्पताल
सरकारी मेडिकल कालेज व जीएनडी अस्पताल शुरू से ही विवाद में रहे हैं। घटिया प्रबंधन के चलते प्रिंसिपल डॉ. सुजाता शर्मा, वाइस प्रिंसिपल डॉ. वीना को हटा दिया गया था। मेडिसिन विभाग के मुखी डॉ. शिवचरण को सस्पेंड कर दिया गया था। मामले में भद पिटने से हर कोई बचाव की मुद्रा में दिखा।

नियमों का दिया हवाला
परिजनों ने कहा, पंजाब सरकार की कोविड गाइडलाइन के पेज नंबर 7 पर गाइडलाइन 11 के ऑप्शन 3 में साफ तौर पर लिखा है कि जब कोरोना के मरीज की मौत होती है तो संस्कार करने वालों के लिए शव के बैग को खोल कर पारिवारिक सदस्यों को चेहरा दिखाना अनिवार्य है। परन्तु प्रबंधन ने सभी नियमों की धज्जियां उड़ाईं।
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