चंडीगढ़। पंजाब में 70 हजार 137 फर्जी पेंशनधारकों का मामला धीरे-धीरे राजनीतिक रूप लेने लगा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा फर्जी पेंशनधारकों का डाटा जारी कर शिरोमणि अकाली दल पर हमला करने के बाद अब कांग्रेस के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ भी इस मामले में कूद पड़े हैं। उनका कहना है कि अकाली दल की 'वोट के बदले पेंशन' की राजनीति न कामयाब हुई और न ही होगी। कैप्टन के बाद जाखड़ के तेवर देखते हुए यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में अकाली दल के लिए यह मुद्दा गले की फांस बन सकता है।

'वोट के बदले पेंशन' की राजनीति न कामयाब हुई, न होगी : जाखड़
दूसरी तरफ अकाली दल का कहना है कि कांग्रेस सरकार केवल अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐसा कर रही है। अगर वास्तव में सरकार गंभीर है तो लोगों को बताए कि इस मामले में कितने अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की। बता दें कि फर्जी पेंशनधारकों से पंजाब सरकार 162 करोड़ रुपये की रिकवरी करने जा रही है।

कांग्रेस सरकार केवल अपनी नाकामी छिपा रही है : अकाली दल
एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने कहा था कि संगरूर के बाद बादल और मजीठिया परिवार के हलकों में 26,308 फर्जी पेंशनधारक पाए गए। इससे सरकारी खजाने को 48.79 करोड़ रुपये की चपत लगी। अहम बात यह है कि सामाजिक पेंशन को लेकर हुई जांच में सर्वाधिक 12,573 फर्जी पेंशनधारक संगरूर जिले में पाए गए। यहां से तत्कालीन वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा थे।

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