Report: Ravi Kumar
तरनतारन। पंजाब का सीमा क्षेत्र अमरकोट सेक्‍टर पाकिस्‍तानी तस्‍करों और घुसपैठियों के लिए बेहद मुफीद बन गया है। यहां से पाकिस्‍तान की ओर से लगातार घुसपैठ होती रही है। इस क्षेत्र से होकर पाकिस्तान की ओर से हथियार, हेरोइन व जाली करंसी भारतीय सीमा में भेजने का सिलसिला जारी है। तरनतारन के अमरकोट सेक्टर में दो दिन पहले पांच पाकिस्तानी घुसपैठियों को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा मार गिराए जाने के बाद बड़े खुलासे हुए हैं। ये घुसपैठिये अपने साथ बड़ी मात्रा में हथियार व हेरोइन ला रहे थे। नशा व हथियार तस्‍कर पंजाब में बड़ी चुनौती बन गए हैं। इनके तार खालिस्‍तानी आतंकियों से जुड़े हुए हैं। 

पिछले साल यहीं से ड्रोन के जरिए भेजी थी हथियारों व हेरोइन की खेप
इसी सेक्टर से पिछले साल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने ड्रोन के जरिए हथियार और हेरोइन भेजी थी। बॉर्डर पर कंटीली तार लगने से पहले घोड़ों के माध्यम से सोने के बिस्कुट और अफीम की तस्करी के लिए भी इसी सेक्टर का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद धीरे-धीरे आतंकवाद को बढ़ावा देने लिए पड़ोसी मुल्क ने हथियार भेजना शुरू कर दिए। इस सेक्टर से मात्र 1.5 किलोमीटर चलने के बाद ही भारतीय सीमा में पहुंचा जा सकता है। इसलिए एक बार फिर पाक की नजरें अमरकोट सेक्टर पर टिक गई हैं।

कड़ी सुरक्षा के बावजूद भारतीय क्षेत्र में पहुंच जाती है सप्लाई
पंजाब के जिला फाजिल्का, फिरोजपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर व तरनतारन का 530 किलोमीटर का क्षेत्र कंटीली तार के अधीन आता है, जबकि 220 गांवों की 21,300 एकड़ जमीन तार वाले क्षेत्र में आती है। तरनतारन की 87 किलोमीटर सीमा पाकिस्तान से सटी है।

पंजाब में जब आतंकवाद चरम पर था तो बॉर्डर पर कंटीली तार लगाई गई थी। यह काम 1989-90 में मुकम्मल हुआ। प्रदेश में आतंकवाद तो खत्म हो गया, लेकिन नशे और जाली करंसी की स्मगलिंग चलती रही। इस क्षेत्र को आइएसआइ भी सेफ जोन मान कर  यहां से तस्करी को बढ़ावा दे रही है।
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