मोगा। पंजाब में पराली से बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए भले ही सरकारी प्रयास सिरे न चढ़े हों लेकिन जिले की रणसींह कलां की पंचायत ने सराहनीय पहल करते हुए बडा़ कदम उठाया है। इसी साल दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी रणसींह कलां ग्राम पंचायत ने गांव की आमसभा में दो एकड़ या उससे कम जमीन के मालिक किसानों को पराली न जलाने पर प्रति एकड़ 500 रुपये का मुआवजा देने का एलान किया है।

गांव के युवा सरपंच प्रीतिंदर पाल सिंह के अनुसार पिछले साल गांव के एक भी किसान ने खेतों में पराली को आग नहीं लगाई थी। प्रदेश सरकार ने पराली न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये सहायता राशि देने का एलान किया लेकिन वादा पूरा नहीं किया।

500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देगी, गांव के गरीब बुजुर्गों को 750 रुपये मासिक पेंशन

उन्होंने कहा कि गांव में पराली को आग न लगाने का जो फैसला लिया गया है उससे किसान पीछे नहीं हटेंगे। गांव की पंचायत उनके साथ खड़ी है और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए ही पंचायत ने किसानों को राहत देने का फैसला लिया है।

ये फैसले भी सराहनीय  

- गांव के बुजुर्ग महिला या पुरुष, जिनके परिवार में आय का कोई साधन नहीं है, उन्हें पंचायत 750 रुपये प्रति महीना पेंशन देगी।

- गांव के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का एक लाख रुपये तक का इलाज भी पंचायत अपने खर्चे पर करवाएगी। किसी बीमा कंपनी से अनुबंध नहीं किया गया है।

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