लुधियाना । कोरोना से ठीक होने के बाद भी बहुत से मरीज पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पा रहे हैं। उनमें अब भी कहीं न कहीं कोरोना के लक्षण मौजूद रहते हैं। इस वजह से उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से एक समस्या है, पोस्ट कोविड पल्मनरी फाइब्रोसिस। शहर के बड़े अस्पतालों में अब पोस्ट कोविड पल्मनरी फाइब्रोसिस से जूझ रहे मरीज आने लग गए हैं।

इससे पीडि़त मरीजों को सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा थकान, आक्सीजन सेचुरेशन इंप्रूव न होना, बार-बार सांस चढऩा, सूखी खांसी होते रहना जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। यही नहीं, कई मरीजों को तो आक्सीजन की जरूरत भी पड़ रही है। दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (डीएमसी) के प्रोफेसर डा. अमित बेरी के अनुसार पोस्ट कोविड पल्मनरी फाइब्रोसिस से पीडि़त मरीजों में ज्यादातर साठ साल से अधिक आयु वाले स्वस्थ हो चुके मरीज देखने को मिल रहे हैं। वहीं दीपक अस्पताल की मेडिसिन विशेषज्ञ डा. मनीत कहती हैं कि उनके पास पोस्ट कोविड पल्मनरी फाइब्रोसिस के ऐसे मरीज आ रहे हैं, जो मोटापा, डायबिटीज से पीडि़त होने के अलावा कोरोना संक्रमण की चपेट में आए और लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहे।

क्या है पोस्ट कोविड पल्मनरी फ्राइब्रोसिस

डा. मनीत के अनुसार, पोस्ट कोविड पल्मनरी फाइब्रोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़ों के नाजु़क हिस्सों को नुकसान पहुंचता है। फेफड़े सख्त हो जाते हैं। एक्टिव फेफड़ा कम रह जाता है जिससे आक्सीजन और कार्बन डाइक्साआइड एक्सचेंज होना कम हो जाता है। अगर सही तरह से इलाज न हो तो जिंदगी भर फेफड़ों संबंधी परेशानी रह सकती है। कई मामलों में पल्मनरी फाइब्रोसिस समय के साथ बेहद गंभीर भी हो सकता है।

पोस्ट कोविड पल्मनरी फाइब्रोसिस की दो बड़ी वजह

पहली : घर के पास ही दवा लेते रहे

अगर किसी को लक्षणों के साथ कोरोना हो गया और उसकी आक्सीजन सेचुरेशन लगातार कम हो रही है, लेकिन संक्रमित अस्पताल में भर्ती न होकर घर पर ही सेल्फ मेडिकेशन यानी लोकल केमिस्ट से खुद ही दवा लेते रहे। आक्सीजन सेचुरेशन कम होने का मतलब यह है कि बीमारी ने फेफड़ों पर असर कर दिया। ऐसे में जब तक मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक वायरस की वजह से फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।

दूसरी : गाइडलाइन का पालन नहीं करना

अस्पताल में इलाज के बाद नेगेटिव आने पर नियमों का पालन नहीं करना है। कई मरीज खुद को पूरी तरह ठीक समझते हुए फालोअप छोड़ देते हैं जबकि गाइडलाइन के अनुसार कोविड के मरीज को कम से कम आठ सप्ताह तक मानिटर करना होता है। इसके अलावा सेवियर कोविड मरीज को पोस्ट कोविड पल्मनरी फ्राइब्रोसिस हो सकता है। सेवियर कोविड पेशेंट वह होते हैं, जिनको लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहना पड़ा हो। इसके अलावा मोटापे व डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों को को पोस्ट-कोविड फाइब्रोसिस हो सकता है।

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