नई दिल्ली I केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान कई दिनों से विरोध कर रहे हैं। कई महीनों से चल रहे उनके इस प्रदर्शन का अगला पड़ाव दिल्ली है। वे अब सड़कों पर उतर चुके हैं और दिल्ली पहुंचने के लिए संघर्षरत हैं। पंजाब से लेकर हरियाणा की सड़कों पर किसानों का आंदोलन गुरुवार को जारी रहा। पुलिस से कई झड़पों, आंसू गैस के गोले छोड़ने और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करने के बाद भी वे पीछे हटने को तैयार नही हैं। किसानों को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिसबलों की तैनाती की गई है और कई जगहों पर किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने सड़कों को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके बावजूद किसान आगे बढ़ते जा रहे हैं। अब किसान दिल्ली के करीब पहुंच आए हैं और आज किसी भी वक्त राजधानी में प्रवेश कर सकते हैं, मगर उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने भी पूरी तैयारी कर ली है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंन्द्र सिंह तोमर ने गुरुवार को कहा कि वह किसानों की मांगों के लिए न हां कह सकते हैं और ना ही ना कह सकते हैं। यह पहली बार था जब ऐसा संकेत आया कि केंद्र सरकार इनकी मांगों पर विचार कर सकती है। हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में पूछे गए प्रश्न कि क्या सरकार किसानों की मांगों पर विचार करेगी, पर कृषि मंत्री तोमर ने कहा, "अभी मैं इसके बारे में हां भी नहीं कह सकता और ना भी नहीं कह सकता।"

कृषि मंत्री और खाद्य मंत्री पियूष गोयल के साथ 13 नवंबर को हुई एक मीटिंग में किसान प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए 3 कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की थी या या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी के नीचे खरीद को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की थी।

कृषि मंत्री तोमर ने कहा, "हाल ही में आए कानूनों का लक्ष्य कुछ और है। यह किसानों के हित में हैं। ये क्रय-विक्रय, कॉन्ट्रैक्ट कृषि आदि से जुड़े हैं। एमएसपी उनके विस्तार से बाहर है।" इन बिलों को लेकर सरकार अपनी बात पर डंटी है। सरकार के मुताबिक यह बदलाव बड़े खरीददारों को लाएंगे, सुपरमार्केट और निर्यातकों को उनके द्वार तक लेकर आएंगे। हालांकि किसान यूनियनों का कहना है कि नए कानूनों के तहत ऐसा हो सकता है कि सरकार गारंटीकृत मूल्यों पर अनाज खरीदना बंद कर दे, और उन्हें निजी खरीददीरों की दया पर निर्भर रहना पड़े। दूसरी ओर सरकार ने कहा है कि वह किसानों से अनाज खरीदना जारी रखेगी।

कृषि मंत्री तोमर ने कहा, "मोदी सरकार ने 2013-14 और 2020-21 के बीच चावल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 43 प्रतिशत तक बढ़ाया है।" उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार की तुलना में एनडीए सरकार ने धान की सरकारी खरीद को दोगुना किया है। धान की कुल एमएसपी 2014-19 के बीच रु.4.34 लाख करोड़ बढ़ी है, जबकि 2009-14 तक यह सिर्फ रु. 2.88 लाख करोड़ ही थी। उन्होंने कहा, एमएसपी के लिए हमारी प्रतिबद्धता तय है। सरकारी खरीद का तंत्र जारी रहेगा। मैं अपने सभी किसान भाईयों से यह आग्रह करना चाहता हूं कि हम बातचीत से मामले को सुलझाने के लिए तैयार हैं। इसीलिए मैंने उन्हें 3 दिसंबर को बात करने के लिए आमंत्रित किया है।  

आपको बता दें कि सरकार 23 तरह की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है और ज्यादातर फसलों को इन्हीं दामों पर खरीदती है। यह छोटे किसानों के लिए बहुत फायदा पहुंचाता है। 

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