गया संवाददाता

वसीम अंसारी

इंसाफ एक्सप्रेस


घटनास्थल से हिरण का सिर बरामद किया गया।

हिरण को काटने वाले युवक रामेश्वर भूईया को हिरासत में लिया गया।

गया जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत भोकहा पंचायत के बड़ाकागंसा गांव टोला मोरमा में एक हिरण को टागी से काटकर मार डाला। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर उसे एक से दूसरे जगह शेयर करना शुरू कर दिया। जिसके बाद देखते ही देखते यह वीडियो वायरल होनी शुरू हो गई। वायरल विडियो में देखा जा रहा है कि कुछ ग्रामीण एक जगह हिरण को पकड़कर काट रहे है। आसपास कुछ ग्रामीण यह भी बता रहे है कि हिरण नहीं काटिए इससे बहुत बड़ा केस हो सकता है। जबकि दूसरे ग्रामीणों ने यह तक कह डाला कि यह हिरण की अच्छी कीमत ₹10000 मिल सकती है। पुरा विडियो बनाने वाले एक युवक ने यह कह दिया कि यह घटना मोरमा गांव निवासी रमेश भुईया एवं अन्य लोगो काट रहे है।

गया जिले में जब वीडियो वायरल होनी शुरू हो गई तो प्रशासनिक से लेकर वन विभाग की टीम हरकत में आ गई। जब यह वायरल वीडियो पत्रकारों तक पहुंचने के बाद तुरंत वन विभाग के डीएफओ से बात की गई और इस घटना के बारे में उन्हें सूचना दिया गया। जिसके बाद इस घटना की जानकारी लेने के लिए वन विभाग की टीम को घटनास्थल पर रवाना किया गया। वही मौके पर पहुंचे इमामगंज वन विभाग के अधिकारी एस बी ओ अमरजीत कुमार ने घटनास्थल से हिरण की सिर बरामद किया गया और एक को हिरासत में लिया गया। जिसका नाम रामेश्वर भुईया मोरमा गांव के डुमरिया प्रखंड के रहनेे वाला हैै।


मंगलवार की रात्रि में हिरण को पकड़ा गया था जिसके बाद ग्रामीणों के सामने बुधवार की सुबह हिरण का सिर काटा गया और उसे वीडियो बनाकर वायरल किया गया।जिसके बाद हरकत में आई वन विभाग की टीम ने घटनास्थल से सिर बरामद किया और एक को गिरफ्तार किया गया।


1972 में पारित हुआ अधिनियम, 2003 में हुआ संशोधित


वन्य जीव संरक्षण अधिनियम को भारत सरकार ने वर्ष 1972 में पारित किया था। इसके बाद इसे वर्ष 2003 में संशोधित किया गया। इस कानून का मकसद वन्य जीवों के शिकार को रोकना और उनके मांस व खाल की तस्करी पर रोक लगाना था। इस कानून में कुल 6 अनुसूचियां हैं। ये अनुसूचियां अलग—अलग तरह से वन्यजीवों को सुरक्षा प्रदान करती हैं।


 


अधिकतम 7 साल की सजा और 25 लाख रुपए जुर्माना:


इस कानून की सूची एक और सूची दो में आने वाले वन्य जीवों का शिकार करने पर न्यूनतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। इसे 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही इसमें न्यूनतम आर्थिक दंड 10 हजार रुपए है। अधिकतम आर्थिक दंड 25 लाख रुपए है। साथ ही दूसरी बार अपराध करने पर भी इतनी ही सजा का प्रावधान। दूसरी बार अपराध करने पर जुर्माना कम से कम 25 हजार रुपए तक हो सकता है।


सूची एक में शामिल हैं 43 वन्य जीव:


वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की सूची एक में करीब 43 वन्य जीवों को शामिल किया गया है। इनमें सुअर, कई तरह के हिरण, बंदर, भालू, चिंकारा, तेंदुआ, लंगूर, भेड़िया, लोमड़ी, डॉलफिन, कई तरह की जंगली बिल्लियों, बारहसिंगा, बड़ी गिलहरी, पेंगोलिन, गैंडा, ऊदबिलाव, रीछ और हिमालय पर पाए जाने वाले कई जानवर शामिल हैं।

Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours