चंडीगढ़। इस युवा ने अपने सपने को ही ताकत बना लिया और जीवन की कठिनाइयों के बीच मंजिल तक पहुंचने का रास्‍ता बना लिया। चंडीगढ़ में सिक्‍योरिटी गार्ड का काम करने वाले व्‍यक्ति के पुत्र ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन कर खुद के साथ-साथ माता-पिता के संघर्ष को सार्थक कर दिया। गरीबी और मुश्किल हालातों से संघर्ष की एक युवा की यह गाथा अद्भूत और प्रेरक है।

दड़वा में किराये के मकान में रहने वाले सिक्योरिटी गार्ड शोभाकांत उपाध्याय के बेटे सोनूकांत उपाध्‍याय लेफ्टिनेंट बने हैं। देहरादून में सैन्‍य अकादमी के पासिंग परेड में उनको लेफ्टिनेंट बनाया गया तो इस अवसर पर उनके माता-पिता भी मौजूद थे। मूलरूप से बिहार के सीवान जिले के रहने वाले सोनूकांत की इस कामयाबी के पीछे संघर्ष की अनोखी कहानी है। सोनूकांत ने बताया कि दड़वा में 17 साल तक उनका परिवार एक कमरे में रहा। इस कमरे का किराया सौ रुपये था, इसलिए कमरे के आकार का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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