मोहाली/चंडीगढ़ 

Golden Overseas chandigarh



चंडीगढ़ (रोहित कुमार ) जैसे जैसे कोरोना थोड़ा कम होता जा रहा है वैसे ही काल बना कोरोना अपने दुवारा बर्बादी का मंजर भी दिखता जा रहा है उस बर्बादी में कहीं न कहीं सब से ज़्यादा फायदा नकली इमीग्रेशन दफ्तरों ने उठाया है । चण्डीगठ में इस समय सैंकड़ों से मृत ज़मीर लोग नकली इमीग्रेशन दफ्तर खोले बैठे हैं यह लोग कनाडा वर्क परमिट के नाम पर लोगों की भविष्य और ज़िन्दगियों से खेल रहे हैं। ऐसा ही कुछ तूच काम Golden overseas sector 47 chandigath के एक दफ्तर ने किया है जिस ने एक ऐसे शख्स की ज़िंदगी को बर्बाद करने की कोशिश की है जो भक्त ज़्यादा गरीब है बेरोज़गार है और उसके मां बाप भी नहीं है इस शख्स का नाम है नाग बंसी वासी विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश का रहने वाला है । बंसी ने अपना सुनहरा भविष्य बनाने के लिए इस मृत ज़मीर और बेशर्म इंसान को 1 लाख से ज़्यादा पैसा दिया ताकि यह दफ्तर वाला उसको विदेश में पक्की नॉकरी लगवा सके लेकिन अब हालात यह हो गई है कि न तो बंसी को विदेश भेजा गया और न ही उसका पैसा वापस किया जा रहा है । सूत्रों के अनुसार बंसी ने चंडीगढ़ पुलिस को अपनी शिकायत में लिखा है कि अगर उसका पैसा वापस न किया गया तो वो अपनी जान दे देगा और इस शिकायत की जानकारी इस बेशर्म दफ्तर वालों को भी है लेकिन फिर भी उसका पैसा वापस नहीं किया जा रहा है इसका मतलब कहीं न कहीं यह कि इस Golden overseas immigration को चंडीगढ़ पुलिस या प्रशासन का सहयोग है। हमारे सूत्रों के अनुसार Golden overseas sector 47 chandigath का मालक परमिंदर है जो कुरुक्षेत्र हरयाणा का रहने वाला है । इस शख्स की हड़धर्मी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह पैसे से ज़्यादा किसी को नहीं चाहता और ऐसे लोगों को पुलिस ने चंडीगढ़ में कनाडा व अन्य प्रदेशों में काम पर लगवाने की दुकान खोलने की इजाज़त दे रखी है। ऐसे लोगों से सावधान रहिए और इनकी तुरंत सूचना पुलिस को दें।  क्या इस Golden overseas के पास MHA लाइसेंस है । क्या इस दफ्तर में काम करने वाले लोगों की पुलिस वेरिफिकेशन करवाई गई है । क्या परमिंदर जो कि इस दफ्तर का मालक है उसकी वेरिफिकेशन हुई है । जब से यह दफ्तर खुला है क्या अब तक इस इमीग्रेशन दफ्तर की पॉलिसीके ने जांच की है कि अब तक कितने लोगों का वीजा लगा है और कितने कयने पैसे लिए गए हैं और जिनका वीज़ा नहीं लगा उसका पैसा वापस किया गया है या नहीं। जब से यह दफ्तर खुला है तबसे अब तक कितने दफ्तर के कर्मचारियों ने काम छोड़ा है और क्यों छोड़ा है क्या काम छोड़ने से पहले लोकल थाने को इसकी जानकारी दी गई थी। अगर MHA लाइसेंस नहीं तो यह शक्स चंडीगढ़ में कनाडा या अन्य देशों के नाम पर वर्क परमिट का धनफ कैसे कर रहा है । यह वो सवाल हैं जिस का जवाब स्तानीय थाने के प्रभारी व ssp चंडीगढ़ से जल्द पूछा जाएग । कब तक यह लोग जनता की कमाई पर हाथ साफ करते रहेंगे। ऐसे लोगों से सावधान रहें । 

 

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